Poems in Hindi For Class 8 | कक्षा 8 के बच्चो के लिए कविताएँ

Poems in Hindi For Class 8 - कक्षा 8 के बच्चो के लिए हिंदी कविताएँ 


Hindi poem for class 8
Poems in Hindi for class 8
Poems in Hindi For Class 8 #1
 जो अवसर को खो देते है,
जीवन भर वे रोते है |
भाग्य और किस्मत की बाते
कर्मठ नहीं किया करते है |
अपने कर्मो के प्रकाश से
अंधियारे को वे हरते है |
फसलें वे ही काटा करते
ठीक समय पर जो बोते है |
जीवन पथ में आने वाली
हंसकर आंधी से लड़ना |
मेहनत के बल पर ही केवल
उन्नति की छोटी पर चढ़ना|
कुल के सभी कलंक भागीरथ,
बनकर बच्चे ही धोते है ||
Hindi Poems For Class 8 #2
भूख गरीबी लाचारी को,
इस धरती से आज मिटाये |
भारत के भारतवासी को ,
उनके सब अधिकार दिलाये |
रहे ना कोई आज निरक्षर,
ऐसी नई चेतना लाये |
जाति-धर्म के भेद भूलाकर
सबको अपने गले लगाए |
सत्य न्याय के पथ पर चलकर,
कुछ अभिनव आदर्श बनाये|
अपने आदर्शो के बल पर
एक नया विश्वास जगाये|
भारत के सब भारतवासी,
प्रगति मार्ग पर बढ़ते जाये |
जिस पर गर्व करे जग सारा,
ऐसा भारतवर्ष बनाएं ||

Poems in Hindi For Class 8 #3
धरती माँ ने जन्म दिया हैधरती माँ ने पाला है |
किन्तु हाय हमने धरती कासर्वनाश कर डाला है |
जिन वृक्षो ने धरती माँ केगहरे जख्मो को पाटा|
बड़े बेरहम होकर हमनेऐसे वृक्षो को काटा |
आंधीतूफांबाढ़बवंडरइसे नष्ट कर जायेंगे |
नष्ट अगर धरती होगी तोहम सब भी मिट जायेंगे ||
Poems in Hindi For Class 8 #4
लहसुन गुणकारी होता है,
खाओ खून साफ़ होता है |
सर्दी का तो  दुश्मन है,
इसलिए प्रिय जन जन है |
प्याज दवा होती गर्मी की,
लू से हमें बचाती है|
खाना के संग सलाद में,
भोजन शीघ्र पचाती है|
Poems in Hindi For Class 8 #5
बच्चो अपनी राह बनाओ,
राह बनाकर चलते जाओ |
मंजिल अपने आप मिलेगी,
द्रढ़ प्रतिज्ञ हो कदम बढ़ाओ|
तूफानों से मत घबराओ,
आये कितनी भी बाधाएं,
हिम्मत करके बढ़ते जाओ |
हिम्मतसाहस और लगन से,
जो चाहो सो बन सकते हो |
अपने साथ दूसरो के भी,
जीवन में रस भर सकते हो |
मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ है,
इसे न यूँ ही व्यर्थ गवाओ,
कुछ भी बनोमगर कुछ बनकर,
मानव जीवन सफल बनाओ ||
Hindi Poems  For Class 8 #6
फूले से नित हंसना सीखो,
भौरो से नित गाना |
तरु की झुकी डालियो से,
नित सीखो शीश झुकाना |
सीख हवा के झौकों से लो,
हिलनाजगत हिलाना |
दूध और पानी से सीखो,
मिलना और मिलाना |
सूरज की किरणों से सीखो,
जगना और जगाना |
लता और पेड़ो से सीखो,
सबको गले लगाना |
मछली से सीखो स्वदेश के,
लिए तड़प कर मरना |
पतझड़ के पेड़ो से सीखो,
दुःख में धीरज रखना |
पृथ्वी से सीखो प्राणी की,
सच्ची सेवा करना |
दीपक से सीखो जितना,
हो सके अँधेरा हरना |
जल धारा से सीखो,
जीवन पथ में बढ़ना |
और धुए से सीखो हरदम,
          ऊंचाई पर ही चढ़ना ||                  
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