Poem on Trees in Hindi | वृक्ष प्रकृति के जीवन दाता

Poem on Trees in Hindi - पेड़ो पर आधारित अच्छी कविताएँ 

Poem on Trees in Hindi
Poem on Trees in Hindi


Poem on Trees in Hindi #1

कभी खड़ा था वृक्ष यहां पर
आसमान से बातें करता था |
कौवे  कांव-कांव करते थे
और पक्षी चहकते  रहते थे |
तोता मैना गीत सुनाकर
सबका मन बहलाते  थे |
अपने सुंदर रूप से वे
आंखें तृप्त कर देते थे |
हरी भरी पत्तियों के डालें
हवा में झूला करती थी |
कोयल भी चढ़कर पेड़ पर
पत्ते चबाया करती थी |
कितनी रौनक थी चारो तरफ
लोग पिकनिक मनाने आते थे |
भरपूर पेड़ कि छाव तले
सब मिलकर खाना खाते थे |
सूरज की छिटकी किरणों में
बच्चे भी मौज उड़ाते थे |
क्रिकेट खेलकरगेंद उछालकर
वे अपना मन बहलाते थे |
समुन्द्र तट की शीतल लहरों से
जल तरंग का लुत्फ़ उठाते थे |
रंग बिरंगी किश्तिया भी
पानी में तैरती रहती थी |
मीनल अपना नर्त्य दिखाकर
सबको आकर्षित करती थी |
कितना रमणीक था दृश्य वहाँ का
जाने किसने छीन लिया  ?
काट दिया वृक्ष (trees) को जड़ो से
और बाग़ को बंजर बना दिया |
कल रौनक थी इस बगिया में
आज है जैसे मर्तक निवास |
सूनी बगिया देख कर
टूट गई जीवन की आस ||

Poem on Trees in Hindi #2

गर्मी से तपती धरती को,
पेड़ (Trees) सगण छाया देते है |
थके हुए राही के तन की,
ये थकान सब हर लेते है |
पेड़ बिना लालच के सबको,
मीठे-मीठे फल देते है |
शीतल मंद समीर बहाकर,
मन को पुलकित कर देते है |
मेघो को ये मित्र बनाकर,
खेतो में जल बरसाते है |
हरे भरे पेड़ो से बच्चो,
किसानो का मन हर्षाते है |
पेड़ो की महिमा को समझो,
सारे जग को भी समझाओ|
प्रीतिदिन अपने हाथो से तुम,
नए नए नित पेड़ लगाओ ||
डॉ० परशुराम शुक्ल

Poem on Trees in Hindi #3

गन्दी वायु कोस्वयं लीलकर,
वातावरण शुद्ध बना रहे है पेड़ |
पक्षियों के कलरव से झूम झूम,
मन ही मन गुनगुना रहे है पेड़ |
अपनी अदभुत आकर्षक क्षमता से,
वर्षा के बादल बुला रहे है पेड़ |
धूप से थके बटोही पर हाथ फेर,
आतप की थकान मिटा रहे है पेड़ ||

Poem on Trees in Hindi #4 

पेड़ जीवन है हमारा
पेड़ ही धन है हमारा |
पेड़ को जो नष्ट करता,
 दुष्ट दुश्मन है हमारा |
पेड़ को क्यों काटते हो 
डाल हरदम छांटते हो |
स्वयं अपने हाथो से क्यों
मुश्किलों को बांटते हो ||
मधु सूदन साहा

Poem on Trees in Hindi #5

सबको मैं(Tree) फल फूल लुटाता
ठंडी छाया देता |
सेवा मेरा परम धर्म है 
दान न कोई लेता |
मुझे मिटाकर क्या पाओगे 
रोगभूखबीमारी |
वृक्ष प्रकृति के जीवन दाता
ये सम्पदा तुम्हारी |
उन्हें सहेजे और सँवारे
महके जीवन क्यारी |
तन मन महके जीवन चहके
महक उठे फुलवारी |     
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