Poem on Nature in Hindi | प्रकृति से बाते करती सुन्दर कविताएँ

प्रकृति (Nature) हमें जीवन जीने की कला सिखाती है| प्रकृति, ईश्वर का ही दूसरा रूप है जिसके नित नए-नए रंग रूप देखने को मिलते हैं | प्रकृति ने बिना किसी बदले की भावना के हर प्राणी को अपना आशीर्वाद दिया है | देने की भावना हमें प्रकृति से सीखनी चाहिए और इससे प्रेरित होकर जीवन को जीना चाहिए| कवि ने अपनी कविताओं (Poem on Nature in Hindi) के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपने मन में उठते हुए भावो को इस प्रकार प्रकट किया है:-

Poem on Nature in Hindi - प्रकृति पर आधारित कविताएँ 


Poem on Nature in Hindi
Poem on Nature in Hindi


Poem on Nature in Hindi #1

फूलों को किसने सिखलाया, मधुर मधुर मुस्काना |
कोयल को किस ने सिखलाया, मीठा मीठा गाना |
कौन सूर्य को चमका कर हरता जग का अँधियारा|
कौन रात को भी देता हैचंदा में उजियारा |
किसने ज्योति भरी तारो मेंपेड़ो में हरयाली?
रोज सबेरे फैला देता, कौन पूर्व में लाली ||
मंजुला वीर देव 

Poem on Nature in Hindi #2

ठंडक से दिन सिकुड़े सिमटे
लम्बी लम्बी काली राते
यादो में ही सिमट गयी है
वर्षा की मतवाली बाते
सूरज दादा ठन्डे ठन्डे 
ठंडी ठंडी उनकी धूप
पर्वत की बर्फीली चोटी
ने भी बदला अपना रूप ||

Poem on Nature in Hindi #3

प्रकृति हमारी सबकी अपनी,
जो सचमुच ईश्वर का तन है
रंग बिरंगे दृश्य अनोखे
सचमुच यह हम सबका मन है
नदियां वृक्ष लता औषधियां 
यही जगत का सच्चा धन है
वन हमको सब कुछ देते है
इसलिए वन ही जीवन है ||

Best Poem on Nature in Hindi #4

फूल गए ,पत्ते गए
टूट गयी अब डाल
सब कुछ मिटटी में मिल गया
और मिटटी बन गयी खाद
अंकुर फूटे खाद से
वह फिर पौधा बन जाए
पौधे से वह पेड़ बने
और पत्तो से भर जाए
पेड़ो पर जब फूल लगे
 तो वे फलो से भर जाए
टहनी पर जब फल लगे
तो डाली सब झुक जाये
सब जीवो को कंद मिले
और पत्ते फिर झर जाए
पत्ते जब झरे मिटटी में
तो फिर से खाद बन जाए
फूटे अंकुर खाद से
वह फिर पौधा बन जाये
पौधे से वह पेड़ बने
और पत्तो से भर जाये ||
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