Poem on Child Labour in Hindi | बाल मजदूरी एक अभिशाप

बाल मजदूरी समाज में एक अभिशाप है| बाल मजदूर निर्धनता की देन है जो सुखमय जीवन जीने से वांछित है और दूसरो की इच्छा पूर्ती के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे है | इस कविता (Poem on Child Labour in Hindi) में कवि ने निःसहाय बच्चों के प्रति अपनी सच्ची भावना को व्यक्त किया है  


Poem on Child Labour in Hindi
Poem on Child Labour in Hindi

Poem on Child Labour in Hindi - बाल श्रम पर कविता

निर्धनता की देन हैये बालक मजदूर,
दुःख ही दुःख इनको मिलेसुख से कोसो दूर,
फ़ाक़ाकश है जिंदगीबचपन का अभिशाप,
काम ढूंढ़ते फिर रहेकरते करुण विलाप |
ये गुलाब के फूल हैइनमे गंध अपार,
फिरते कटी पतंग सेअजब पेट की मार |
कोल्हू के बैलो समानकरते है ये काम,
नहीं रात में नींद हैदिन को न आराम |
स्टेशन पर ट्रैन मेंफिरते हाथ पसार,
रूखा सूखा जो मिलेकरते विवश आहार |
नहीं पेट भर अन्न हैतन के लिए न वस्त्र,
भिखमंगे बनकर रहेनिशदिन होते त्रस्त |
होटल में या मीलों मेंमिल जाते कुछ काम,
मलिन मानसिकता लिएपा जाते कुछ दाम |
धरती इनका बिछोनाछप्पर है आकाश,
खाते सबकी गालियांफिरते बने उदास |
बुनियादी जो हक़ हैदेता इनको कौन,
नियम बना कर के बड़ेहो जाते है मौन |
अवसर यदि इनको मिलेहोगा सही विकास,
     पढ़ लिख कर जीवन सुखदबना सकेंगे आप ||        
अवधकिशोर सक्सेना                   
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