Inspirational Poems in Hindi | प्रेरणादायक हिंदी कविताएँ

जीवन में कभी हार नहीं मानी चाहिए और हर मुश्किल का डटकर मुकाबला करना चाहिए| इन संदेशों को ही कवि अपनी प्रेरणादायक  कविताओं (Inspirational Poems in Hindi) के माध्यम से पहुंचाने का प्रयास कर रहे है |

Poem on Inspiration in Hindi -  प्रेरणादायक कविताएँ 


Motivational Poems in Hindi
Poem on Inspiration in Hindi


Inspirational Poems in Hindi #1

मै नन्हा सा अंकुर मुझको
सूरज पाना है |
आंधीपानीतेज हवाएं,
शीत लहर तूफानी |
जाना मुझको दूर बहुत है,
राह बड़ी अनजानी |
चारो तरफ बवंडर फिर भीजड़े जमाना है |
मै नन्हा सा अंकुर मुझकोसूरज पाना है |
फूल हमेशा कभी खिले,
बस एक बार ही खिलता है |
यह जीवन ऐसा जीवन,
जो एक बार ही मिलता है |
इस छोटे से जीवन में,
कुछ कर दिखलाना है|
मैं नन्हा सा अंकुर
मुझको सूरज पाना है ||
राजा चौरसिया 

Inspirational Poems in Hindi #2

क्या कहाकठिन है कामकभी ऐसा मत बोलो तुम |
कर सकते हो हर कामशक्ति अपनी तो तोलो तुम |
यदि आसान है कामभला उसका फिर करना क्या ,
जिसको मंजिल तक जाना हैउसको फिर डरना क्या |
श्रम करते ही रहने से हर मुश्किल हल होती है,
डूबे बिन सागर तल मेंमिलता किसको मोती है |
कायर ही कठिनाई का रोना ले रुक जाते है,
वीरों के चरणों पर आकरपर्वत झुक जाते है ||
रामेश्वर दयाल 
Motivational Poems in Hindi #3
सीख 
धरती से सीखा है हमने सबका बोझ उठाना |
और गगन से सीखा हमनेऊपर उठते जाना |
सूरज की लाली से सीखाजग आलोकित करना |
चंदा की किरणों से सीखासबकी पीड़ा हरना |
शेरो से सीखा है हमनेअपनी रक्षा करना |
और शहीदों ने सिखलाया हँसते हँसते मरना ||

डॉ०  परशुराम शुक्ल

Inspirational Poems in Hindi #4

जहां पर चांद तारे हैं,
खड़े मंगल हमारे हैं|
बड़े सूरज सभी से तो,
उजाले लाख सारे हैं,
सिरे मिलते रहे सबके,
उसी विश्वास को छू ले|
चलो आकाश को छू ले|
धरा छूकर उठे हैं हम,
कर्म पथ पर डटे हैं हम,
भले हो दूर सीमाएं,
उन्हीं से पर सटे हैं हम,
खिले हैं फूल भी अनगिनत,
नए मधुमास को छू ले,
चलो आकाश को छू ले ||
डॉ० तारादत्त निर्विरोध 

Poem on Inspiration in Hindi #5

कर नहीं सकते हैंकभी मुंह से कहो ना यार,
क्यों नहीं कर सकते उसेयह सोचो एक बार|
हो मत हो पर कीजिएहिम्मत कभी ना हार,
नहीं बने एक बार तो कीजै सौ सौ बार |
जो जल में नहीं घुसेतैरना उसको कैसे आवे,
जो गिरने से हिचकेउसको चलना कौन सिखावे |
जल में उतर तैरना सीखोदौड़ो सीखो चाल,
निश्चय कर सकते हैकहकर सदा रहो खुशहाल 
बाल मुकुंद गुप्त 


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